पत्नी और 3 बच्चे संग खुले आसमान में जीवन बिताने को मजबूर - Rtikudra.blogspot.com

भ्रष्टाचार और कुरीतियों पर लेखनी से प्रहार

Breaking

03 मई 2020

पत्नी और 3 बच्चे संग खुले आसमान में जीवन बिताने को मजबूर

लाल कार्ड जारी करने के 6 महीने बाद भी दखल नहीं दिला पाया प्रशासन। 
मामला बिहार प्रदेश के कैमूर जिला अंतर्गत कुदरा थाना के करमा गांव का।
सुधारमानंद के नाम जारी लालकार्ड 

पटना उच्च न्यायालय में लंबे समय से चल रहे अतिक्रमण केस में 18 मार्च 2019 को स्वर्गीय देऊ सिंह के पुत्र सुधरमानन्द सिंह का आशियाना उजाड़ कर बेघर कर दिया गया। उच्च न्यायालय के आदेशानुसार उजाड़े गए बेघर लोगों को पुनः स्थापित करने के लिए नियम संगत लाल कार्ड बना कर स्थापित करने के आदेश पर लाल कार्ड निर्गत किया गया। जैसा कि सभी को पता है कि लाल कार्ड निर्गमन से पहले आनाबाद बिहार सरकार सर्वसाधारण भूमि की जांच कर वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट देने के बाद ही लाल कार्ड निर्गत किया जाता है।कुछ लोगों को लाल कार्ड देकर स्थापित भी किया गया परंतु आज तक यह बदनसीब विस्थापित है।खाता 43, प्लॉट नंबर 174 में 02 डिसमिल भूमि की बंदोबस्ती केस नंबर 1- 2019/20 से करीब छः महीने पूर्व में ही की गई है। परंतु आज तक दखल नहीं मिलने से पत्नी और तीन बच्चों (14 वर्षीय शीतल कुमारी ,12 वर्षीय गौतम कुमार व 9 वर्षीय सिमरन कुमारी) के संग खुले आसमान के नीचे जीवन गुजर बसर करने को मजबूर है। जबकि लाल कार्ड पर अंकित भूमि पर प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत सुभान्ता देवी पति सुधरमानन्द सिंह के नाम से आवास निर्माण करने की स्वीकृति दी गई है। लाल कार्ड द्वारा बंदोबस्त की गई भूमि का दखल ना होने के कारण आवास निर्माण कार्य भी अवरुद्ध है। लॉक डाउन में सरकार की लोक #शिकायत निवारण प्रणाली के कार्य न करने के कारण शिकायतकर्ता को इ- मेल का सहारा लेना पड़ा।
पत्नी संग सुघरमानंद सिंह 
आवेदक ने अनुमंडल पदाधिकारी, भूमि सुधार उप समाहर्ता और जिलाधिकारी के पास मेल से की है शिकायत |प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के शिकायत पोर्टल पर भी आवेदक द्वारा दर्ज की गई है अपने दुःख की वृतांत।
-"सबका साथ सबका विकास" स्लोगन इस आवास विहीन, गरीब और बेबस मजदूर को दिवा स्वप्न सा ।सपना को हकिकत करने की उम्मीद शासक बने लोक सेवक से|

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मर्यादित शब्दों का प्रयोग कर कमेन्ट में अपनी राय दीजिये|