कुदरा। जैसा कि हम सभी को पता है नागरिकों के मौलिक अधिकार में सूचना का अधिकार भी शामिल हैं। बिहार सरकार द्वारा वर्ष 2006 वर्ष 2007 और वर्ष 2009 में इसमे संशोधन भी किया गया। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 26 (1) (घ) में प्रावधान किया गया है कि प्रत्येक लोक प्राधिकार/ लोक सूचना पदाधिकारी/ सहायक लोक सूचना पदाधिकारी एवं अन्य पदाधिकारियों /कर्मचारियों को अधिनियम के बारे में प्रशिक्षण सुनिश्चित करना है। बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) द्वारा प्रमंडल स्तर पर पदाधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए कार्यक्रम आयोजित भी किया गया। लेकिन अभी भी अधिकांश लोक सूचना पदाधिकारी/ सहायक लोक सूचना अधिकारी के स्थानांतरण हो जाने के कारण प्रमंडल /जिला स्तर पर प्रशिक्षण आयोजित करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
| बिहार सरकार का ऑनलाइन R.T.I.होम पेज का प्रारूप |
बात दरअसल यह है कि ऑनलाइन या ऑफलाइन अंचल कार्यालय कुदरा जिला कैमूर {भभुआ} बिहार से सूचना मांगने पर प्रपत्र (घ) प्रारूप में सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती है। जिसमें मांगी गई सूचना या उसका अंश, सूचना मांगने की तिथि, दी जा रही सूचना, सूचना देने की तिथि, प्रथम अपीलीय प्राधिकार का नाम, पता, अपील करने की अंतिम तिथि और विवरण के साथ लोक सूचना पदाधिकारी का नाम पदनाम, संपर्क नंबर ईमेल पता देना होता है।
सामान्य प्रशासन विभाग बिहार सरकार पटना द्वारा निर्देशित है कि विभिन्न कंडिका में मांगी गई सूचना का विषय एक ही लोक प्राधिकार से संबंधित हो तो उसे आवेदक को उपलब्ध कराया जाए अगर अलग-अलग विषय से संबंधित है तो प्रथम विषय मात्र से सूचना देना होगा और आवेदक को परामर्श देना होगा कि अन्य विषय में से प्रत्येक के संबंध में अलग-अलग आवेदन करें इस निर्देश का उल्लंघन किया गया है।
इस अधिनियम के प्रावधान के अनुसार दस्तावेजों या अभिलेखों की टिप्पणी, उद्धरण या प्रमाणित प्रति लेना शामिल है। पर दी गई सूचना में अवलोकन करने का जिक्र है जबकि मांगी गई सूचना में प्रमाणित प्रति का जिक्र है।एक दुसरे आवेदन पर दी गई सूचना में अंकित है कि किसी भी व्यक्ति की प्रॉपर्टी संबंधी विवरणी धारा 8 से अपवादित है। यहां मैं स्पष्ट करना चाहूंगा कि कार्यालय में कोई भी कागजात किसी न किसी व्यक्ति की प्रॉपर्टी से ही संबंधित है जो एक सूचना के रूप में कार्यालय में है। अगर बात राइट टू प्राइवेसी की है तो अंचल कार्यालय में संधारित कोई भी पंजी, कोई भी दस्तावेज, कोई भी अभिलेख किसी भी आवेदक को सूचना में नहीं मिल सकती। जबकि आवेदक द्वारा किसी व्यक्ति विशेष का दस्तावेज नहीं जहानाबाद और नेवरास पंचायत की सरकारी भूमि के दस्तावेज की मांग की गई है। जो बिहार सरकार का रिकॉर्ड है। वर्ष 2019 में मेरे द्वारा अंचल कार्यालय कुदरा से सरकारी भूमि के रिकॉर्ड की मांग की गई। राज्य सूचना आयोग के आदेश पर अंचल कार्यालय कुदरा से वह सूचनाएं दी गई थी ।
अब लगता है बिना राज्य सूचना आयोग के आदेश का कोई भी सूचना अंचल कार्यालय कुदरा से नहीं मिलेगी ऐसा शुरू से होता आ रहा है। अब ऐसे मैटर पर अपीलीय प्राधिकार और बिहार राज्य सूचना आयोग को संज्ञान लेने की जरूरत आन पड़ी है।
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