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18 जुलाई 2019

ससमय सूचना देने में कैमूर जिला पीछे

ससमय #सूचना देने में कैमूर जिला पीछे 

बिहार राज्य सूचना आयोग का आदेश 
 सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी या किसी विभाग अथवा कार्यालय में संधारित पंजी, दस्तावेज या अभिलेख की प्रमाणित प्रतिलिपि पाने या अपने आवेदन पर हुई कार्रवाई की जानकारी #सूचना के  द्वारा किसी भी नागरिक को पाने का प्रावधान है।
#सूचना मांगने पर ससमय सूचना उपलब्ध नहीं होने पर प्रथम अपील की जाती है फिर भी #सूचना ना मिले या गलत या भ्रामक सूचना मिलने पर आयोग में अपील करने का प्रावधान है।
प्रत्येक लोक प्राधिकारी के कार्यकरण में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के संवर्धन के लिए तथा लोक प्राधिकारीयों के नियंत्रण अधीन #सूचना तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए नागरिकों को #सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत सूचना पाने का प्रावधान है। एक आवेदक द्वारा फरवरी 2019 तक 69 ऑनलाइन आरटीआई  विभाग व जिला तथा प्रखंड के लोक #सूचना पदाधिकारी से  की गई है। 42 आवेदन पर राज्य #सूचना आयोग के आदेश पर सूचना दी गई।जबकि 27 #सूचना अभी तक अप्राप्त है।  केंद्र सरकार से ऑनलाइन मांगी गई 11 #सूचना व चार अपील में से सभी #सूचना ससमय प्राप्त हुई है। ऐसे में पारदर्शिता व उत्तरदायित्व के संवर्धन है की बात बेमानी साबित हो रही है।जबकि ऑफलाइन भी  ससमय #सूचना देने में लोक सूचना पदाधिकारी समय सीमा के अनुपालन में उदासीन रवैया दिखा रहे हैं।
  बिहार में तो लोक #सूचना पदाधिकारी को करीब 1 साल तक का समय मिल जाता है।
29 जून 2018 को मांगी गई #सूचना नहीं मिलने पर 7 अगस्त 2018 को प्रथम अपील की गई। प्रथम अपील से भी कोई सूचना या  आदेश प्राप्त न होने पर 13 मई 2018 को आयोग में द्वितीय अपील  करने के बाद वाद संख्या जुलाई 2019 के पहले सप्ताह में आयोग द्वारा संधारित कर लोक सूचना पदाधिकारी को  सूचना देने का आदेश दिया गया है। जिसकी सुनवाई अगस्त के पहले सप्ताह में होनी है।यानी एक साल तक #सूचना पेंडिंग रहती है । बिहार राज्य सूचना आयोग से सूचना देने का आदेश देकर वाद संख्या को निष्पादित करने के कारण लोक #सूचना पदाधिकारी का  ढुलमुल रवैया के सामने आते रहता है। बार-बार #सूचना देने में देरी करने पर आवेदक का भी मनोबल गिरने लगता है इस गंभीर विषय को प्रदेश के  आरटीआई कार्यकर्ता हाई कोर्ट ले जाने की तैयारी में है।

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