| दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर |
वित्तीय वर्ष 17-18 का 81 मापी आवेदन पेंडिंग-
कैमूर जिले के कुदरा प्रखंड में पैसा और पैरवी से समय से पहले हो जाएगा आपका काम, जी हां! निर्धारित तिथि के अंदर ही (आवेदन देने के तत्काल बाद) आपको सारी सेवाएं मुहैया कराई जाएंगी। अगर आप रसूखदार हैं या फिर आपने अंचल कर्मियों की जेब गर्म की है।
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| अंचल कार्यालय का फाइल फोटो |
अगर आप नियमानुसार कार्य चाहते हैं तो तय समय सीमा के बाद भी काम होना नामुमकिन सा है। हां परेशानी के बाद शायद संभव हो सकता है। यह हाल है भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र प्राप्त करने, रसीद कटाने, दाखिल खारिज कराने या मापी कराने का। वैसे तो 18 से 20 किलोमीटर की दूरी तय करके आने के बाद भी जांच प्रतिवेदन, अपना प्रमाण पत्र या अपने आवेदन पर अद्यतन जानकारी या कार्रवाई की जानकारी ना मिलने पर जब किसी कर्मियों के बारे में पूछा जाता है तो उनके मोबाइल नंबर की तरफ इशारा किया जाता है लेकिन शायद ही किसी दिन कोई कर्मी मोबाइल फोन उठाएं और जवाब दें कि हम कार्यालय में है छुट्टी पर हैं या कार्यालय के काम से बाहर है।
छोटी-छोटी काम को लेकर आवेदक दिन भर दौड़ लगाते रहते हैं।
हालांकि यह बात भी सही है कि कर्मियों की कमी की वजह से एक राजस्व कर्मी को दो या तीन मौजा का प्रभार दिया गया है नित नए नए नियम और आदेश से कर्मियों की बेचैनी तो बढ़ ही जाती है। लेकिन रैयत जब लगान रसीद के लिए पहुंचते हैं राजस्व कर्मचारी से अंचल कार्यालय में भेंट ना होने पर उन्हें फोन का सहारा लेना पड़ता है फोन भी पहुंच से बाहर है स्विच ऑफ होता है। लगान रसीद कटाने के लिए अधिकारी का जवाब होता है कि रसीद ऑनलाइन कट जाएगा। जबकि करीब आधा से अधिक रैयत के जमीन का विवरण या तो ऑनलाइन में पूरा दर्ज नहीं या रैयत का नाम मौजा का नाम,खाता या रकबा गलत दर्ज है।
अगर किसी की अपनी रैयती जमीन (रकबा या नक्शा के हिसाब से) दखल कब्जा में ना हो या कम एहसास हो तो जैसा कि होता है कि आवेदक को अपनी रैयती भूमि मापी के लिए लगान रसीद के साथ विवाद मुक्त जमीन होने के लिखित आवेदन देने पर मापी की अनुमति अंचलाधिकारी से प्राप्त होती है उसके बाद नजारत में शुल्क जमा करने के बाद मापी वाद संख्या संधारित होती है। वित्तीय वर्ष 17-18 में भूमि मापी के लिए 92 आवेदन में से सिर्फ ग्यारह ही पूर्ण हो पाए।अब देखना यह है कि 81 लोग जिन्होंने शुल्क जमा किया है उनका डिस्पोजल कब तक होता है।
19 जून 2016 से लोक #शिकायत निवारण अधिनियम के शुरुआत होने के बाद इस अधिनियम के तहत 6 महीने में 46 शिकायत पंजीकृत हुआ जिसमें से 19 का ही निष्पादन हो पाया। जुलाई 18 तक यह हाल कि 131 #शिकायत आवेदनों में 20 शिकायत का निष्पादन हो पाया है जबकि 60 कार्य दिवस के अंदर शिकायत का निष्पादन करने का प्रावधान है। वरीय अधिकारी भी इसकी मॉनिटरिंग करते रहते हैं।
(2 अगस्त 19 को #सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त रिपोर्ट) यह रिपोर्ट देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि पंजी अप टू डेट भी नहीं है। निष्पादन की संख्या बढ़ सकती है अब सवाल अंचलकर्मियों पर है जुलाई-18 तक का लोक शिकायत या भूमि मापी पंजी अगस्त 19 तक भी अपडेट नहीं हुआ। इसमें कर्मियों की कमी कहें या लापरवाही लेकिन जो कुछ भी हो #सूचना में लिखित रिपोर्ट तो यही दर्शाता है।
अंचलाधिकारी कुदरा द्वारा दुर्व्यवहार करने की कोई पहली घटना नहीं। पहले भी गृह विभाग को पत्र भेजकर दुर्व्यवहार व प्रताड़ना की शिकायत दर्ज की जा चुकी है।विभाग द्वारा शिकायत की प्रतिलिपि पटना प्रमंडल के आयुक्त
व जिलाधिकारी कैमूर को प्रेषित की गई थी।
विगत हफ्ते भी 107 लोगों का हस्ताक्षर युक्त पत्र जे पी स्वतंत्र सेनानी जिलाध्यक्ष ने जिलाधिकारी को दी जिसमें भी दुर्व्यवहार का आरोप है। वरीय अधिकारियों द्वारा आरोप लगे अधिकारी को ही जांच का जिम्मा दिया जाता रहा है जिससे शिकायत का रिजल्ट शिफर निकला है।
अब देखना यह है कि सिर्फ पत्राचार ही होता है या विभाग इस पर कोई कार्रवाई भी करती है।
दैनिक प्रकाशित समाचार पत्र में खास खबर की क्लिप।
दाखिल खारिज करवाने के लिए कुदरा अंचल कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं लोग ।

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