शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित रह जाते हैं बच्चे, सभी निजी स्कूल पूरा नहीं करते हैं मानक। - Rtikudra.blogspot.com

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18 फ़रवरी 2021

शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित रह जाते हैं बच्चे, सभी निजी स्कूल पूरा नहीं करते हैं मानक।

शिक्षा के मौलिक अधिकार से बच्चे बंचित | निजी स्कूल नहीं करते है मानक पूरा|

यह कहना गलत नहीं होगा कि निजी शैक्षणिक संस्थान वर्तमान में व्यवसाय बन कर उभर रहे हैं जिनका बच्चों की पढाई और मुलभुत सुबिधा से कोई लेना-देना नही।
ऐसा इसलिए कहना पड़ रहा है कि बहुत सारे विद्यालयों में पक्का छत आज भी नहीं कराकट से काम चलता है जो गर्मी में ज्यादा गर्म होने के साथ बारिश में  बूंदों की आवाज से पढ़ाई को प्रभावित करती है।कार्यालय, सभी कक्षा और हाल में बिजली, पंखा,मॉनिटरिंग हेतु सीसीटीवी कैमरा,बालक बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय, शिक्षक और कर्मियों के लिए अलग शौचालय, पेयजल सुविधा, खेल कूद उपकरण, पुस्तकालय, अग्निशामक यंत्र या खेल का मैदान तो सभी निजी विद्यालय में नहीं मिल पाता तो प्रशिक्षित शिक्षक के बारे में सोचना एक कदम आगे बढ़ना होगा|

प्रखंड शिक्षा कार्यालय कुदरा 

 6 से 14 वर्ष के सभी  बच्चों को अपने आसपास के निजी विद्यालय में फ्री में शिक्षा पाने का अधिकार है।शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत प्राइवेट स्कूलों में 25 फीसदी सीट गरीब और वंचित वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए आरक्षित हैं। इस सीट पर एडमिशन लेने वाले छात्रों की फीस, किताब, यूनिफार्म का पूरा खर्च प्रदेश सरकार खुद उठाती है। बच्चों के नामांकन में कोई टेस्ट नहीं लेना और शारीरिक दंड ना देना व मानसिक उत्पीड़न नहीं करना भी उनके मौलिक अधिकार में शामिल है।जिले के सभी निजी विद्यालयों में गरीबी रेखा से नीचे के छात्रों का जिनका निशुल्क नामांकन है उन छात्रों के परिजन/अभिभावक या पिता का बीपीएल कार्ड और आय प्रमाण पत्र की मांग की गई थी| जिस के सत्यापन हेतु वरीय समाहर्ता वरीय उप समाहर्ता को भेजा गया ।बच्चों की पढ़ाई निशुल्क नहीं होती बल्कि निजी विद्यालयों को सरकार द्वारा फीस दी जाती है तभी तो सरस्वती शिशु मंदिर कुदरा को ₹1,56,432 सरस्वती शिशु मंदिर सकरी को ₹1,49,999 और पैराडाइज चिल्ड्रन एकेडमी को ₹4,55,678 देने का प्रस्ताव दिसंबर 2020 में ही स्वीकृत हो चुका था।

बात करें कैमूर जिले की तो केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्धता प्राप्त कैमूर जिले में सिर्फ 13 स्कूल ही हैं। जिनमें कुदरा प्रखंड का इकलौता विद्यालय पैराडाइज चिल्ड्रन एकेडमी शामिल है।   http://cbseaff.nic.in/cbse_aff/schdir_Report/userview.aspx

जिला से मिली जानकारी के अनुसार  कुदरा प्रखंड में 48 विद्यालय संचालित हैं जिनमें 18 निजी विद्यालयों को जांच के बाद जिला द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई है| 30 विद्यालय  जिन्हें जिला द्वारा स्वीकृति पत्र प्राप्त नहीं अभी जांच हेतु प्रक्रियाधीन है। प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार आवासीय बाल प्रतियोगिता निकेतन सकरी और शांतिकुंज पब्लिक स्कूल अमिरथा असबेस्टस में चल रहा है तो सरस्वती शिशु मंदिर सकरी और हैवेन गार्डन चिल्ड्रन एकेडमी कुदरा के बच्चे चापाकल चला कर पानी पी रहे हैं।कुछ विद्यालयों का अपना खुद का भवन है तो कुछ किराए पर संचालित हो रहे हैं वहीं संत जोन्स पब्लिक स्कूल सकरी व माडर्न पब्लिक स्कूल चिलबिली में शुद्ध पानी पीने के लिए आरओ लगा है|

  सब मिलाकर देखना यह है कि शिक्षा सेवा का माध्यम बने व्यवसाय का नहीं लेकिन यह पूर्ण रूप से व्यवसायिक हो चुका है।जहा मुलभुत सुविधा नहीं न प्रशिक्षित शिक्षको द्वारा अध्यापन कार्य होता है बल्कि फीस पर फोकस होता है तभी को प्रार्थना के वक़्त और क्लास में  फीस जमा करने के लिए अभिभावक को रिमाइंडर भेजने का हवाला देकर बच्चों को बोला जाता है | 

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