एक ही घर में 3 या 4 राशन कार्ड तो एक हीं परिवार को मिल रहा प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ।
पात्र लाभुक योजना से रह जाते हैं वंचित, जनप्रतिनिधि और अधिकारियों के करीबी और संपर्क वाले लेते हैं अनुचित लाभ।
हर जगह कमोबेश यही स्थिति।
रमेश कुमार, कुदरा।
प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना के अंतर्गत आर्थिक रुप से गरीब लोगों को मिलता है निशुल्क बिजली कनेक्शन। तो प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना अंतर्गत मिलता है निशुल्क गैस कनेक्शन। अब मजे की बात यह है कि सरकार गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर करने वाले हर परिवार को निशुल्क बिजली और गैस कनेक्शन दे रही है तो इसका लाभ किसने लिया है। क्योंकि प्रति परिवार में एक बिजली कनेक्शन और एक गैस कनेक्शन होता है इससे परिवार के सभी सदस्य लाभ लेते हैं अगर इसी को आधार बनाकर प्रधानमंत्री आवास योजना और राशन कार्ड उपभोक्ता को जोड़ा जाए तो स्पष्ट पता चल जाएगा की एक परिवार एक घर में रहने वाले जिनका एक बिजली कनेक्शन और एक गैस कनेक्शन है वह अवैध रूप से राज्य सरकार और केंद्र सरकार के कितनी योजनाओं का लाभ लेते हैं। इसमें भी स्पष्ट ऐसे हो जाएगा क्योंकि ऐसा निर्देश है कि हर खाता धारी का आधार कार्ड और पैन कार्ड खाता से लिंक किया जाए। राशन कार्ड में और गैस कनेक्शन में खाता की जानकारी अनिवार्य है। उस खाता की जानकारी पूर्ण रूप से एकीकृत कर अनधिकृत रूप से लाभ लेने वाले लोगों को चिन्हित किया जा सकता है। वैसे प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना का लाभ लेने के लिए भी बैंक पासबुक की जानकारी जरूरी है। 24 अप्रैल 2022 के हिंदुस्तान अखबार की माने तो राज्य में कुल जमाबंदी की संख्या 350 करोड़ है। दरअसल होता यह है कि जहां सरकार से व्यक्तिगत लाभ लेना होता है लोग एकल परिवार दिखाते हैं और जहां संयुक्त संपत्ति यह समूह के व्यक्ति से लाभ मिलना होता है तो संयुक्त परिवार के सदस्य का होना सभी व्यक्तियों को बताते हैं। अगर बात सम्मान निधि योजना के की जाए तो पिता को बेटे को पत्नी को अलग-अलग सम्मान निधि का लाभ लेने हेतु अलग परिवार दिखाया जाता है जबकि उन सभी के पास अलग-अलग अपना गैस कनेक्शन अपना बिजली कनेक्शन अपना राशन कार्ड नहीं होता है। स्वच्छता अभियान के तहत हर घर शौचालय निर्माण हेतु प्रोत्साहन राशि को प्राप्त करने के लिए हर व्यक्ति अलग-अलग लाभ लेना चाहते हैं जबकि जहां सरकार को राजस्व देने के बाद आती है चाहे वह लगान हो, बिजली बिल या गैस कनेक्शन वहां संयुक्त परिवार बताते हैं।
दरअसल बताते चलें कि घर में दो पहिया, तिपहिया या चार पहिया वाहन होने, सभी 3 से अधिक कमरे, पक्के की छत, ढाई एकड़ से अधिक है सिंचित भूमि,घर में फ्रिज, एसी और वाशिंग मशीन होने के बाद भी लोग एपीएल बीपीएल कार्ड बनवा कर राशन उठाते तो हैं और उसी दिन या उसे इकट्ठा करके बाजार में बेचते हैं। या फिर ऐसा भी होता है कि राशन कार्ड अपडेट नहीं किया जाता यानी पहले लोग गरीबी रेखा के नीचे थे और उन्हें इसकी जरूरत थी लेकिन समय के साथ घर में सरकारी नौकरी या व्यवसाय होने पर परिवार गरीबी रेखा से तो ऊपर आ जाता है लेकिन बीपीएल कार्ड का उपयोग करना नहीं भूलता नहीं उसमें से नाम कटता है और संबंधित अधिकारी या कर्मचारी भी ऐसे लोगों को चिन्हित नहीं करते जो पहले पात्र लाभुक थे अभी वर्तमान में नहीं। अपात्र राशन कार्ड धारी की संख्या लगभग 30% है लेकिन यह भी सच है कि करीब 30% लोग जो पात्र लाभुक हैं वह इस योजना से वंचित हैं।
यही हाल लगभग मनरेगा मजदूर में है जो बच्चे विद्यालय में पढ़ते हैं बाहर रहकर प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करते हैं और उनके परिवार की महिला सदस्य जो घर से बाहर कदम नहीं रखती वो मनरेगा से मजदूरी प्राप्त करती है। व्यवसाय करने वाले लोगों की संख्या भी कम नहीं है मनरेगा मजदूर में। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसा देखा जाता है कि लगभग सभी काम उपकरण /मशीन से ही होता है और मनरेगा मजदूरों के खाते में आए पैसे कुछ प्रतिशत उन्हें देकर शेष राशि मशीन वाले को दी जाती है।
जिसके कंधे पर रक्षा की जिम्मेदारी, वही करता है पौधे को नष्ट।
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| प्रतीकात्मक तस्वीर |
मनरेगा के तहत लगाए गए पौधे को वनरक्षी के माध्यम से देखरेख का जिम्मा मिलता है। इसके एवज में उन्हें पैसे भी दिए जाते हैं। लेकिन वही वनरक्षी पौधे में लगे गैबीयन को उखाड़ ले जाते हैं और उस पौधे में समय से पानी नहीं देते। उस की निराई गुड़ाई नहीं करते। इसी कारण सरकार द्वारा लगाए गए आधे से अधिक पौधे नष्ट हो जाते हैं पुनः उसी जगह पर पैसा खर्च कर फिर पौधा लगाया जाता है फिर वही हाल होता है। कमोबेश हर पंचायत में यही स्थिति है।
आपसी सहमति बटवारा या मृत रैयत के नाम को हटाकर उनके वंशज के नाम पर जमाबंदी करना भी टेढ़ी खीर साबित हो रही है। कुछ जानकारी के अभाव में और कुछ कर्मचारी के और अधिकारी के सहयोग ना करने के कारण आधे से अधिक जमाबंदी मृत रैयत के नाम से है।
उपर्युक्त वर्णित विषय में कहीं ना कहीं अधिकारी कर्मचारी और जनप्रतिनिधि की मिलीभगत से पात्र लाभुकों तक सरकार की योजना का लाभ नहीं पहुंच पाता अपात्र और हर दृष्टि से संपन्न लोगों को पहले जानकारी होती है और योजना में शामिल हो जाते हैं।

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