"सहारा" से सहारा की उम्मीद,पीएसीएल और बाकी कंपनियों के लिए सिर्फ आश्वासन। - Rtikudra.blogspot.com

भ्रष्टाचार और कुरीतियों पर लेखनी से प्रहार

Breaking

08 जून 2023

"सहारा" से सहारा की उम्मीद,पीएसीएल और बाकी कंपनियों के लिए सिर्फ आश्वासन।

कैमूर भभुआ ।। रमेश कुमार।।
 उच्च ब्याज दर का सपना दिखाकर ठगे गए लोग लगातार अपने पैसे वापस प्राप्त करने के लिए जद्दोजहद में लगे हैं इसी कड़ी में विगत करीब 1 महीने से बड्स एक्ट 2019 के तहत भुगतान पाने के संबंध में समाहरणालय कैमूर भभुआ के कमरा नंबर 12 (भूतल पर ) कार्यालय अधीक्षक के पास फॉर्म जमा किया जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार ऐसे फॉर्म करीब 40,000 से अधिक जमा हो चुके हैं।
इंटरनेट फोटो।
इस चिलचिलाती धूप में फार्म जमा करने वालों में नौजवान से लेकर वृद्ध, महिला व दिव्यांग तक शामिल है। फिक्स डिपाजिट/रिकरिंग डिपॉजिट पर कम समय में उच्च ब्याज के साथ मूलधन पाने के लिए अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई को ब्रोकर के माध्यम से दिया गया है। अवधि पूरा होने के बाद या उससे पहले ही जमा संस्थान रफूचक्कर हो गए। पर अब अपनी डूबी हुई रकम वापस पाने के लिए आवेदन के साथ जमा रसीद की छाया प्रति, आधार कार्ड व पैन कार्ड की छाया प्रति भी संलग्न की जा रही है। स्थानीय एजेंट से जमा कर्ता के बीच अक्सर नोक झोंक देखी जाती है। पैसा कब मिलेगा, कितना मिलेगा, किसके माध्यम से कहां और कैसे मिलेगा इसकी जानकारी तो नहीं मिलती लेकिन इतना जरूर है फोटो कॉपी करने वाले और वहां बैठे ब्रोकर फॉर्म भरने वाले इस प्रक्रिया के तहत मालामाल जरूर हो रहे हैं। इसे चिट फंड के रूप में भी जाना जाता है जो सामूहिक बचत योजना के एक रूप को संदर्भित करता है जिसमें लोगों का एक समूह नियमित अंतराल पर धन के एक सामान्य पूल में एक निश्चित राशि का योगदान करने के लिए सहमत होता है।Crcs यानी सहकारिता विभाग कुछ सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सहारा सेबी खाता से 29 मार्च 2023 को 5000 करोड रुपए की पहली किस्त सहारा के निवेशकों को लौटाने के लिए दियी गयी है जिस पर हम ने आरटीआई लगाकर जवाब मांगा है जिसमें (आरटीआई का जवाब देख लीजिए)
आरटीआई आवेदन
प्राप्त सूचना

प्राप्त सूचना ।



 नीलाम शाखा, कार्यालय अधीक्षक और डीआरडीए कार्यालय कर्मी से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस संबंधित आवेदन/रसीद की फोटो कॉपी जमा करने हेतु कहीं से कोई लिखित अनुरोध या आदेश प्राप्त नहीं है। इस हेतु वित्त विभाग से मार्गदर्शन मांगा गया है। पूरे आवेदन को ऑनलाइन किया जा रहा है। इसे संबंधित को भेजा जाएगा। बातों के क्रम में यह भी जानकारी मिली की यहां फॉर्म जमा करने जैसी कोई बात नहीं है लेकिन उत्तर प्रदेश में फार्म जमा करने के लिए अखबार में खबर प्रकाशित होने के बाद स्थानीय लोग स्वयं फॉर्म लेकर जमा कराने आने लगे कहीं-कहीं तो प्रखंड स्तर पर भी फॉर्म लिया जा रहा है। अब देखना यह है कि लिया गया फॉर्म डस्टबिन में जाता है या फिर निवेशकों को निवेश का पैसा ब्याज समेत हासिल होता है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मर्यादित शब्दों का प्रयोग कर कमेन्ट में अपनी राय दीजिये|